जबलपुर। बिजली उपभोक्ताओं को सस्ते कोयले का फायदा नहीं मिलने पर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने नाराजगी जताई है। मंच ने विद्युत नियामक आयोग को ईमेल भेजकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कोयले के दाम घटने के बाद भी बिजली बिल में राहत नहीं मिली, बल्कि फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया गया।
मंच के अनुसार 22 सितंबर 2025 से कोयले पर 400 रुपये प्रति टन का सरचार्ज हटा दिया गया था, जिससे बिजली उत्पादन सस्ता हुआ। नियम के अनुसार इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आयोग ने भी पहले कहा था कि लागत कम होने पर फ्यूल सरचार्ज के जरिए राहत दी जाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई फायदा नहीं दिखा।
संस्था ने पिछले 6 महीनों के फ्यूल सरचार्ज का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि कोयला सस्ता होने के बावजूद सरचार्ज कम नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता गया। अक्टूबर 2025 में सरचार्ज माइनस 4.73 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 तक घटकर माइनस 0.63 प्रतिशत रह गया। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मंच के पदाधिकारियों ने इस स्थिति को गलत बताते हुए आयोग से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब लागत कम हुई है, तो उसका सीधा लाभ जनता को मिलना चाहिए।