जबलपुर में सुने गए नरसिंहपुर सामूहिक दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी रामलाल ठाकुर को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे गंभीर अपराध में सहयोग करने वाला व्यक्ति भी उतना ही जिम्मेदार होता है जितना मुख्य आरोपी।
न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया की एकल पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति साझा मंशा के साथ अपराध में शामिल है, तो उसकी जिम्मेदारी भी बराबर मानी जाएगी।
पुलिस के अनुसार, रामलाल ठाकुर पर आरोप है कि वह एक नाबालिग आदिवासी लड़की को अपनी गाड़ी में बैठाकर बकौरी के जंगल स्थित एक बंद स्टोन क्रेशर तक ले गया था। वहां मौजूद अन्य आरोपियों—अन्नू उर्फ अनुराग, गणेश ठाकुर और ओमप्रकाश उर्फ पंचू ठाकुर—ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और घटना का वीडियो भी बनाया।
बचाव पक्ष की दलीलें
आरोपी को 31 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। बचाव पक्ष ने कहा कि रामलाल ने खुद दुष्कर्म नहीं किया, सिर्फ सहयोग का आरोप है। साथ ही FIR में देरी, नाम का पहले उल्लेख न होना और पहचान परेड न होने जैसी बातों को आधार बनाया गया। अन्य आरोपियों को जमानत मिलने का हवाला भी दिया गया।
सरकारी पक्ष का जवाब
शासकीय अधिवक्ता स्वाति जॉर्ज ने कोर्ट को बताया कि घटना का वीडियो सबूत के तौर पर मौजूद है, जिसमें आरोपी की मौजूदगी साफ दिख रही है। पीड़िता ने भी वीडियो के जरिए पहचान की है, जिसे कोर्ट ने मजबूत साक्ष्य माना।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने कहा कि गैंगरेप जैसे मामलों में यह जरूरी नहीं कि हर आरोपी खुद शोषण करे। अगर कोई व्यक्ति अपराध में मदद करता है, तो वह भी बराबर का दोषी होता है।
वीडियो साक्ष्य और मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने माना कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, इसलिए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।