जबलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य करने के फैसले से प्रदेश में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस निर्णय से करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की सेवा शर्तों पर असर पड़ने की आशंका है। इसके विरोध में मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने का निर्णय लिया है।
संघ का मुख्य तर्क है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले हुई थी, उन्हें इस अनिवार्यता से बाहर रखा जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं से ली कानूनी सलाह
इस मामले को मजबूती से रखने के लिए संघ की विधि टीम पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में सक्रिय है। टीम ने एसके गांगेले (पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट) से विस्तृत कानूनी चर्चा की है। याचिका के लिए सभी जरूरी दस्तावेज और साक्ष्य तैयार कर लिए गए हैं। संघ की मांग है कि 2013 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मी, संविदा शिक्षक और गुरुजी इस नियम से मुक्त रहें।
दो साल में टीईटी पास करना अनिवार्य
लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) भोपाल ने हाल ही में सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से अधिक समय बचा है, उन्हें टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इसके लिए 2 साल की समय सीमा तय की गई है। तय समय में परीक्षा पास नहीं करने पर सेवा समाप्त करने का प्रावधान भी रखा गया है।
संघ ने तेज की तैयारी
संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव और महामंत्री जितेंद्र सिंह ने याचिका प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विशेष टीम गठित की है। इसमें निरंजन सिंह घुरैया, अशोक दीपेरा, आरडी प्रसाद, जितेंद्र शाक्य और श्रीनारायण चतुर्वेदी सहित कई पदाधिकारी शामिल हैं।
संघ के अन्य नेताओं ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए शिक्षकों के हितों की रक्षा की बात कही है। अब याचिका दायर होने के बाद इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू होगी।