जबलपुर में फर्जी बीमा रजिस्ट्रेशन के कथित घोटाले में मुख्य आरोपी रोहित खटवानी की गिरफ्तारी को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले की जांच पूरी कर ली है और जुटाए गए दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर रोहित खटवानी को मुख्य आरोपी माना है। इसके बावजूद अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यह मामला फिलहाल शहर के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जांच में सामने आई अनियमितताएं
ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह दस्तावेजों में हेरफेर कर फर्जी बीमा पॉलिसी और रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को चलाकर नियमों के विरुद्ध आर्थिक लाभ लिया गया। जांच के दौरान सैकड़ों दस्तावेजों की जांच की गई, जिनमें कई वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच एजेंसी ने तकनीकी तथ्यों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले को सुनियोजित धोखाधड़ी बताया है।
अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया
कानूनी स्तर पर आरोपी को अब तक बड़ी राहत नहीं मिली है। जिला अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई जारी है। अभियोजन पक्ष का कहना है कि आरोपी बाहर रहने पर जांच और साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
गिरफ्तारी में देरी पर उठे सवाल
जांच पूरी होने और निचली अदालत से राहत न मिलने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में जल्द कार्रवाई जरूरी है, ताकि कानून पर भरोसा बना रहे। अब सभी की नजर हाई कोर्ट के आगामी फैसले और ईओडब्ल्यू की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।