जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि न्यायालय परिसरों में सुरक्षा के हालात काफी खराब हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की बेंच ने कहा कि हाल के समय में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां कहीं अदालत की दीवार गिरने से जज घायल हो रहे हैं तो कहीं परिसर में बम जैसी घटनाएं हो रही हैं। इससे साफ है कि सुरक्षा में बड़ी लापरवाही हो रही है।
कोर्ट ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर शासन गंभीर क्यों नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सरकार को 31 मार्च तक प्रदेश की सभी अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हाई कोर्ट में पेश रिपोर्ट में कई बड़ी खामियां सामने आई हैं। बताया गया कि प्रदेश के कई जिला न्यायालयों में अब तक बाउंड्री वॉल नहीं बनी है, जबकि कई तहसील न्यायालयों में दीवारें बहुत छोटी हैं, जिससे कोई भी आसानी से अंदर आ सकता है। इसके अलावा बहुत कम अदालत परिसरों में पुलिस चौकी है और कई जगह पर्याप्त पुलिस बल भी तैनात नहीं है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई अदालतों में सीसीटीवी कैमरों की कमी है और प्रवेश द्वारों पर सही जांच व्यवस्था नहीं है। यही कारण है कि सुरक्षा में लगातार चूक हो रही है।
कोर्ट ने जजों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। कहा गया कि अगर न्यायाधीश ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो न्याय व्यवस्था प्रभावित होगी।
सरकार की ओर से कहा गया कि सुरक्षा सुधार के काम किए जा रहे हैं, लेकिन कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल दावे करने से काम नहीं चलेगा, जमीन पर सुधार दिखना चाहिए।
अब इस मामले में सभी की नजर 31 मार्च को पेश होने वाली रिपोर्ट पर टिकी है, जिसमें सरकार को हर जिले की सुरक्षा स्थिति और किए गए सुधारों की पूरी जानकारी देनी होगी।