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अभियंताओं और बिजली कर्मियों ने किया धरना-प्रदर्शन





जबलपुर। अखिल भारतीय पावर इंजीनियर्स फेडरेशन  के आह्वान पर 12 फरवरी को  मध्यप्रदेश विधुत मंडल अभियंता संघ ने निजीकरण की नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। जबलपुर स्थित शक्ति भवन के मुख्य द्वार पर हजारों की संख्या में जुटे अभियंताओं और बिजली कर्मियों ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

विधुत संशोधन विधेयक और नई पॉलिसी को रद्द करने की मांग

​सभा को संबोधित करते हुए संघ के महासचिव विकास कुमार शुक्ला ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन वितरण, उत्पादन और ट्रांसमिशन कंपनियों में निजीकरण की प्रक्रिया को रोकने के लिए किया गया है। उन्होंने मांग की कि 'इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025' और 'नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026' को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसके अलावा, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में 13 नंबर की नई इकाई स्थापित करने की अनुमति देने और ट्रांसमिशन में टीबीसीबी के माध्यम से हो रहे निजीकरण को बंद करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

आम जनता और किसानों पर पड़ेगा निजीकरण का बोझ

​अभियंता संघ के अध्यक्ष हितेश तिवारी ने चेतावनी दी कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण न केवल कर्मचारियों, बल्कि गरीब उपभोक्ताओं, किसानों और लघु उद्योगों के लिए भी घातक साबित होगा। वेस्टर्न रीजन पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन मनोज तिवारी ने भी कर्मचारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए संगठित रहने और आगामी बड़े आंदोलनों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

 देशभर में होगी 'लाइटनिंग स्ट्राइक'

​ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने जानकारी दी कि पूरे देश में लाखों बिजली कर्मियों ने विरोध जताया है। उन्होंने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि संसद के बजट सत्र में संशोधन विधेयक को पारित करने की कोशिश की गई, तो देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के 'लाइटनिंग स्ट्राइक' (अचानक हड़ताल) पर चले जाएंगे। इस आंदोलन का असर न केवल जबलपुर मुख्यालय, बल्कि पूरे प्रदेश के जिला और क्षेत्रीय स्तर पर देखा गया।

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