जबलपुर में आमजन को भ्रमित करने वाले प्रचार और बिना वैधानिक अनुमति चिकित्सा संस्थान के रूप में पहचान बनाने वाले प्रतिष्ठानों पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। इसी कड़ी में नेपियर टाउन चौथा पुल स्थित नेरोली सलून एंड क्लिनिक पर कार्रवाई की गई।
डर्मेटोलॉजी संगठन की शिकायत के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) द्वारा गठित निरीक्षण दल ने प्रतिष्ठान का निरीक्षण किया। शिकायत में आरोप था कि संस्था के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लेजर और अन्य त्वचा उपचार संबंधी वीडियो प्रसारित किए जा रहे थे, जिससे लोगों को यह भ्रम हो रहा था कि वहां विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हैं।
जांच के दौरान पाया गया कि प्रतिष्ठान में केवल सैलून संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, जबकि नाम और प्रचार सामग्री में अनधिकृत रूप से “क्लिनिक” शब्द का उपयोग किया जा रहा था। निरीक्षण के समय वहां कोई पंजीकृत त्वचा रोग विशेषज्ञ या अन्य चिकित्सक मौजूद नहीं मिला।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनिता उप्पल और नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श विश्नोई की टीम ने कार्रवाई करते हुए प्रतिष्ठान के नाम और साइन बोर्ड से तत्काल “क्लिनिक” शब्द हटवा दिया। साथ ही संचालक को बिना अनुमति या पंजीयन के क्लिनिक, अस्पताल अथवा चिकित्सा संस्थान से जुड़े शब्दों का उपयोग नहीं करने के निर्देश दिए गए।
संस्था संचालक ने लिखित रूप से बताया कि सोशल मीडिया पर प्रदर्शित वीडियो उनकी संस्था के नहीं थे, बल्कि अन्य संस्थानों के वीडियो अपलोड किए गए थे। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित क्षमायाचना भी प्रस्तुत की और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न करने का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि बिना वैध पंजीयन और अनुमति के किसी भी संस्था द्वारा स्वयं को चिकित्सा संस्थान के रूप में प्रस्तुत करना नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में मध्य प्रदेश उपचारगृह एवं रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (पंजीकरण एवं अनुज्ञापन) नियम, 1971 तथा अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर प्रतिष्ठान को सील भी किया जा सकता है।
विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी चिकित्सा सेवा का लाभ लेने से पहले संस्थान की वैधता और वहां कार्यरत चिकित्सकों की योग्यता की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि भ्रामक प्रचार और अनधिकृत सेवाओं से बचा जा सके।