जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे बैटरी संचालित ई-रिक्शों और उनसे प्रभावित हो रही यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के लिए अंतिम अवसर दिया है।
जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना परमिट के संचालित हो रहे हैं, जिससे शहरों में ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि अकेले जबलपुर शहर में ही नौ हजार से अधिक ई-रिक्शा सड़कों पर चल रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर नाबालिग और बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले चालक भी ई-रिक्शा चला रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2018 में भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के तहत ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहनों को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 के अंतर्गत परमिट की अनिवार्यता से छूट दी गई थी, लेकिन अब इस छूट का व्यापक दुरुपयोग हो रहा है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहनों को दी गई परमिट छूट को वापस लेने या उसमें संशोधन करने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत में तर्क दिया कि ई-रिक्शा को मिली छूट के कारण शहरों में इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि लगभग हर सड़क पर ई-रिक्शा दिखाई दे रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस व्यवस्था की समीक्षा करने और आवश्यक संशोधन करने की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से उपस्थित असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिस पर हाईकोर्ट ने चार सप्ताह की मोहलत प्रदान की है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष सामने आएगा, जिस पर प्रदेश में ई-रिक्शा संचालन से जुड़े नियमों और व्यवस्थाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय हो सकता है।