कटनी। विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्राम बकेली में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जर्जर झोपड़ी में लंबे समय से कथित तौर पर निजी अस्पताल संचालित किया जा रहा था, जहां मरीजों का इलाज बेहद असुरक्षित परिस्थितियों में किया जा रहा था। मामले का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार गांव में "निखिलेश्वर चिकित्सालय" नाम से संचालित इस अस्पताल में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव था। अस्पताल पूरी तरह एक कच्ची झोपड़ी में संचालित हो रहा था, जहां छत को सहारा देने वाली लकड़ियों का इस्तेमाल मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाने के स्टैंड के रूप में किया जा रहा था। वायरल वीडियो में एक महिला मरीज को लकड़ी के सहारे रस्सी से ग्लूकोज की बोतल टांगकर उपचार देते हुए देखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल का संचालन डॉ. सी.पी. सिंह नाहर (आयुष) और डॉ. भूपेंद्र सिंह नाहर द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि झोपड़ीनुमा भवन में बिना पर्याप्त संसाधनों और सुरक्षा इंतजामों के मरीजों का इलाज किया जा रहा था। अस्पताल के अंदर भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन और अन्य चिकित्सा सामग्री भी रखी हुई मिली, जबकि वहां की व्यवस्था किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल जैसी नहीं थी।
वीडियो और तस्वीरों में अस्पताल के अंदर धूल, गंदगी और अव्यवस्थित माहौल दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में मरीजों के इलाज से संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। खासतौर पर ग्लूकोज और इंजेक्शन जैसी प्रक्रियाओं के दौरान स्वच्छता की कमी मरीजों की जान के लिए जोखिम बन सकती है।
मामला सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि किसी झोपड़ी या बिना मान्यता प्राप्त भवन में क्लीनिक अथवा अस्पताल का संचालन नियमों के विरुद्ध है। मामले की जांच के लिए विकासखंड स्तर पर विशेष टीम गठित कर दी गई है।
सीएमएचओ ने बताया कि जांच दल को मौके पर जाकर अस्पताल की वैधता, उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सा पद्धति और दवाइयों के उपयोग की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग अब यह भी जांच करेगा कि अस्पताल के पास संचालन की वैध अनुमति थी या नहीं तथा वहां एलोपैथिक उपचार किस आधार पर किया जा रहा था। मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और बिना पर्याप्त संसाधनों के संचालित हो रहे निजी चिकित्सा संस्थानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग मजबूरी में ऐसे केंद्रों पर इलाज कराने पहुंचते हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधितों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।