जबलपुर- प्रांतीय शासकीय प्राध्यापक संघ ने प्रेस वार्ता कर उच्च शिक्षा विभाग और शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. आनंद शर्मा और संरक्षक प्रो. कैलाश त्यागी ने कहा कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और प्रशासन की उदासीनता से शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
पेंशन और भुगतान में देरी पर नाराजगी
संरक्षक प्रो. त्यागी ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले भुगतान में 6 महीने से लेकर एक साल तक की देरी हो रही है। उन्होंने इसमें भ्रष्टाचार की आशंका जताई। साथ ही अर्जित अवकाश (लीव) के भुगतान भी कई सालों से लंबित बताए गए।
सार्थक ऐप और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर सवाल
प्रांताध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि “सार्थक ऐप” की तकनीकी खामियों से शिक्षक परेशान हैं। इसके अलावा शिक्षकों से जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्य भी कराए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जगहों पर कनिष्ठ कर्मचारी प्राध्यापकों की गोपनीय रिपोर्ट (ACR) लिख रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
परिवीक्षा अवधि बनी परेशानी
संघ ने 2004-05 में नियुक्त शिक्षकों की लंबी चल रही परिवीक्षा अवधि का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इससे शिक्षकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी हो रही है। साथ ही खेल अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी रखी गई।
आंदोलन की चेतावनी
प्रेस वार्ता में मौजूद संभागीय अध्यक्ष प्रो. अरुण शुक्ल ने कहा कि यदि जल्द समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो प्रवेश प्रक्रिया शुरू होते ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
संघ ने साफ किया कि अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया, तो सड़कों पर उतरकर विरोध किया जाएगा।