जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का एक बड़ा मामला सामने आया है। संस्थान के प्रबंधन ने अब तक की जांच के आधार पर लगभग 6645622 रुपये के गबन की पुष्टि की है। इस बड़ी राशि के गायब होने की खबर के बाद कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जांच के दायरे को बढ़ाते हुए अब बैंक खातों और रसीदों का मिलान गहनता से किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने संदिग्धों के खिलाफ सबूत जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
कैशियर की भूमिका बनी हुई है संदिग्ध
इस पूरे प्रकरण में सहायक ग्रेड 3 के पद पर तैनात कैशियर अरविंद धुर्वे मुख्य रूप से संदेह के घेरे में हैं। प्रारंभिक जांच में अरविंद धुर्वे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से वित्त विभाग से हटाकर दूसरे विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया है। उनके साथ ही एक अन्य कर्मी विशाल उसरेठे का नाम भी इस जांच में शामिल है जिन्हें भी अन्य विभाग में भेज दिया गया है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर नवनीत सक्सेना ने मामले की पारदर्शिता के लिए 3 सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया है जो हर स्तर पर दस्तावेजों की जांच कर रही है।
पुराने लेन-देन के विवरण से खुलेगा राज
घोटाले की जड़ें काफी पुरानी बताई जा रही हैं। जांच टीम ने सरकारी बैंक से वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2026 तक का पूरा बैंकिंग स्टेटमेंट मांगा है। यह जांच मुख्य रूप से वर्ष 2020 से वर्ष 2025 के बीच हुए वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है। बताया जा रहा है कि मरीजों के इलाज के दौरान ओपीडी स्लिप और विभिन्न जांचों से प्राप्त होने वाली राशि को सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय निजी तौर पर हड़प लिया गया। कॉलेज की ऑडिट रसीद बुक और बैंक में वास्तव में जमा की गई राशि के बीच भारी अंतर पाया गया है।
कॉलेज प्रबंधन ने कहा, सख्त एक्शन लेंगे
प्रबंधन का मानना है कि पिछले 6 साल के बैंक स्टेटमेंट आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि कुल कितनी राशि सरकारी खाते में जमा हुई और कितनी राशि का गबन किया गया। डीन डॉक्टर नवनीत सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है और जैसे ही रिपोर्ट फाइनल होगी दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वर्तमान में लेखा विभाग के सभी पुराने दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है ताकि गबन की सही राशि और इसमें शामिल अन्य संभावित चेहरों का पता लगाया जा सके।