जबलपुर। आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) को-ऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा संचालित पेट्रोल पंप में सोमवार सुबह अचानक ताले नहीं खुले। जानकारी लेने पर पता चला कि पेट्रोल पंप के कर्मचारी वेतन बढ़ाने और नियमानुसार पीएफ कटौती की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद सोसाइटी प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिसके बाद उन्हें काम बंद करने का फैसला लेना पड़ा।
हड़ताल के कारण पेट्रोल वितरण व्यवस्था प्रभावित हो गई और पूरी निर्माणी में हड़कंप मच गया। स्थिति संभालने के लिए आनन-फानन में मैनेजर और एक अन्य कर्मचारी को पेट्रोल पंप भेजा गया, लेकिन बाकी कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार नहीं हुए।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें केवल 10 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाता है। इतना ही नहीं, पेट्रोल पंप में होने वाले नुकसान की भरपाई भी उनके वेतन से काट ली जाती है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार असामाजिक तत्व बिना पैसे दिए पेट्रोल भरवाकर चले जाते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय सोसाइटी प्रबंधन संबंधित कर्मचारी के वेतन से रकम काट लेता है।
हड़ताली कर्मचारियों का यह भी कहना है कि उन्हें नौकरी के समय नियमित किए जाने का भरोसा दिया गया था। कई कर्मचारी पिछले 10 साल से अधिक समय से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें नियमित नहीं किया गया। साथ ही वर्षों से काम करने के बावजूद उनका पीएफ भी नहीं काटा जा रहा है। इसी वजह से कर्मचारियों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर वे आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं, वहीं सोसाइटी के अध्यक्ष देहरादून घूमने गए हुए हैं। इससे कर्मचारियों में और अधिक असंतोष है।
वहीं, ओएफके को-ऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार का कहना है कि कर्मचारियों ने दो माह पहले नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और पीएफ को लेकर पत्र दिया था। इस मुद्दे पर जनरल बॉडी मीटिंग में चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि वे फिलहाल शहर से बाहर हैं और कर्मचारियों को अचानक हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए था।