जबलपुर। मेडिकल प्रवेश परीक्षा के कथित पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर ने जिले के हजारों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों को गहरा झटका दिया है। देश की इस महत्वपूर्ण परीक्षा के निरस्त होने से छात्रों में मायूसी और अभिभावकों में भारी चिंता का माहौल है।
जबलपुर शहर सहित बेलखाडू, कटंगी, पाटन और सिहोरा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के कई परिवारों ने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना पूरा करने के लिए अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी थी। मध्यमवर्गीय, किसान और मजदूर परिवारों ने कोचिंग फीस, हॉस्टल और पढ़ाई के खर्च के लिए कर्ज तक लिया। कई अभिभावकों ने जमीन गिरवी रखकर बच्चों की पढ़ाई जारी रखी थी।
छात्रों ने इस परीक्षा के लिए सालों तक कठिन मेहनत की। कई विद्यार्थी शहर के हॉस्टलों और किराए के कमरों में रहकर पढ़ाई कर रहे थे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्र रोज लंबा सफर तय कर कोचिंग पहुंचते थे। छात्रों ने त्योहार, मनोरंजन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रोज 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की थी।
अब परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के सामने दोबारा तैयारी की चुनौती खड़ी हो गई है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए लंबे समय तक कोचिंग, हॉस्टल और परिवहन का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है। कई छात्रों का कहना है कि दोबारा तैयारी की सोच से ही मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले के बाद परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा के कड़े इंतजाम होने चाहिए ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।
लोग अब परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं। कई छात्रों ने ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था लागू करने की बात भी कही है। फिलहाल जिले के हजारों छात्र नई परीक्षा तिथि का इंतजार कर रहे हैं।