भोपाल: गवर्नमेंट रेलवे पुलिस में अब जिला पुलिस से आने वाले पुलिसकर्मियों को सीधे फील्ड में तैनाती नहीं दी जाएगी। पहले उन्हें 15 दिन का विशेष ओरिएंटेशन कोर्स करना होगा। यह प्रशिक्षण जीआरपी मुख्यालय श्यामलाहिल्स में आयोजित किया जाएगा। कोर्स पूरा करने के बाद ही संबंधित पुलिसकर्मी को फील्ड ड्यूटी संभालने की अनुमति मिलेगी।
राजा बाबू सिंह के अनुसार रेलवे पुलिसिंग का कार्य सामान्य जिला पुलिस से काफी अलग होता है। यहां कई बार अपराध एक जिले में होता है, जबकि उसकी जानकारी दूसरे जिले में मिलती है। ऐसे मामलों में घटनास्थल, अपराध की समय-सीमा और अधिकार क्षेत्र तय करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
विवेचना और फील्ड कॉन्सेप्ट पर रहेगा फोकस
रेल मुख्यालय का मानना है कि इस विशेष प्रशिक्षण से पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली शुरू से स्पष्ट होगी। इससे उन्हें भविष्य में विवेचना और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने में मदद मिलेगी। रेलवे पुलिसिंग में लगातार ट्रेनों की आवाजाही, अलग-अलग जिलों का समन्वय और कम समय में कार्रवाई जैसी चुनौतियां रहती हैं। इसी कारण यह विशेष ट्रेनिंग शुरू की गई है।
जिला पुलिस और जीआरपी में प्रमुख अंतर
जिला पुलिस का कार्यक्षेत्र तय और स्थायी होता है, जबकि जीआरपी का काम ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर लगातार बदलती परिस्थितियों में होता है।
रेलवे मामलों में अपराध एक जिले में और शिकायत दूसरे जिले में दर्ज हो सकती है।
रेलवे एक्ट और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अलग जानकारी जरूरी होती है।
कोर्स में सिखाई जाएंगी ये बातें
रेलवे पुलिसिंग की मूल संरचना
ट्रेन और स्टेशन आधारित अपराधों की विवेचना
मल्टी-डिस्ट्रिक्ट केस हैंडलिंग
यात्री सुरक्षा और ट्रेन एस्कॉर्ट ड्यूटी
क्यूआरटी ऑपरेशन और फील्ड रिस्पॉन्स
चलती ट्रेन में अपराध से निपटने की भी मिलेगी ट्रेनिंग
जीआरपी में कार्यरत क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) चलती ट्रेनों में होने वाले अपराधों पर तुरंत कार्रवाई करती है। ओरिएंटेशन कोर्स में जिला पुलिस से आए जवानों को क्यूआरटी की कार्यप्रणाली और ट्रेन ऑपरेशन के दौरान कार्रवाई की बारीकियां भी सिखाई जाएंगी।
अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षण के दौरान इनडोर और आउटडोर दोनों तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें रेलवे एक्ट, ट्रेनों में अपराध की जांच, मल्टी-डिस्ट्रिक्ट समन्वय, यात्री सुरक्षा, स्टेशन ऑपरेशन और ट्रेन एस्कॉर्टिंग जैसे विषय शामिल रहेंगे।