Dhirendra Krishna Shastri और Shyam Manav के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है, और इसने ‘श्रद्धा बनाम अंधश्रद्धा’ की बहस को तेज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला (सरल शब्दों में)
नागपुर के रेशिमबाग में 25 से 30 अप्रैल तक बागेश्वर धाम की रामकथा हो रही है। इसी दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने अपने विरोधियों को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि जो भी उनके चमत्कारों पर शक करता है, वह सामने आकर खुद देख सकता है। उन्होंने “दिव्य दरबार” लगाने की बात भी कही, जिसमें वे लोगों की समस्याएं और निजी जानकारी बताने का दावा करते हैं।
श्याम मानव की चुनौती
इस पर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के नेता श्याम मानव ने अपनी चुनौती और कड़ी कर दी।
पहले 30 लाख रुपये का इनाम था, जिसे बढ़ाकर 80 लाख कर दिया गया।
उन्होंने शास्त्री से कहा कि किसी अनजान व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर या घर की जानकारी सही-सही बताकर दिखाएं।
शर्त यह रखी कि अगर शास्त्री 90% तक सही साबित होते हैं, तो वे अपनी संस्था बंद कर देंगे और उनके अनुयायी बन जाएंगे।
साथ ही, श्याम मानव ने आरोप लगाया कि इस तरह के दावे लोगों को भ्रमित करते हैं।
क्यों हो रही है बहस?
यह विवाद सिर्फ दो लोगों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ी बहस बन गया है:
एक पक्ष इसे आस्था और विश्वास से जोड़कर देखता है
दूसरा पक्ष इसे वैज्ञानिक सोच और अंधविश्वास के खिलाफ मानता है
यही वजह है कि नागपुर समेत कई जगहों पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।