जबलपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश के जबलपुर, भोपाल, इंदौर, रीवा और ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टर स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) ने घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे ओपीडी में सेवाएं नहीं देंगे। इसके चलते अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
जूडॉ की हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में केवल अत्यंत गंभीर मरीजों का ही ऑपरेशन किया जाएगा। ऐसे में हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
अप्रैल 2025 से मिलना था नया स्टाइपेंड
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार शासन के आदेश के मुताबिक सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार शासन और संबंधित विभागों को इस बारे में अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
जेडीए के नेतृत्व में प्रदेश के करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस आंदोलन में शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में यही डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाओं का लगभग 70 प्रतिशत काम संभालते हैं और मरीजों के इलाज से लेकर उनकी निगरानी तक की जिम्मेदारी निभाते हैं।
डीन और एचओडी को सौंपा ज्ञापन
जेडीए ने बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में डीन और विभागाध्यक्षों (एचओडी) को ज्ञापन सौंप दिया गया है। इसमें बताया गया है कि सुबह 9 बजे से सभी रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न हड़ताल पर बैठेंगे। हालांकि आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।
तीन दिन से काली पट्टी बांधकर कर रहे विरोध
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर काम करते हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित करना है और जल्द समाधान की उम्मीद है।