जबलपुर। प्रवर्तन निदेशालय ने शहर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राजुल ग्रुप से जुड़े कारोबारी प्रियांक मेहता के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 के तहत की गई, जिसमें विदेशों में निवेश के लिए धन के इस्तेमाल की जांच की जा रही है।
एक साथ कई जगहों पर कार्रवाई
जांच एजेंसी की टीम ने एक ही समय पर आवासीय और व्यावसायिक परिसरों समेत तीन लोकेशन पर तलाशी ली। इस दौरान कई अहम कागजात और इलेक्ट्रॉनिक डेटा बरामद हुआ, जिससे संदिग्ध लेनदेन के संकेत मिले हैं।
नकदी मिलने से बढ़ी जांच
कार्रवाई के दौरान करीब 31 लाख रुपये कैश मिला, जिसका स्पष्ट स्रोत नहीं बताया जा सका। ऐसे में एजेंसी ने इस रकम को जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
विदेशों में पैसे भेजने का मामला
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि बड़ी रकम को पहले अमेरिका ट्रांसफर किया गया और फिर वहां से पुर्तगाल भेजा गया। डॉलर और यूरो में भेजी गई यह राशि करोड़ों में बताई जा रही है।
पुर्तगाल में प्रॉपर्टी का खुलासा
जांच में यह भी जानकारी मिली कि लिस्बन में एक महंगा फ्लैट खरीदा गया है। इस संपत्ति से किराए के रूप में आय भी हो रही है, जबकि विदेशी बैंक खाते में अभी भी बड़ी राशि जमा बताई जा रही है।
गहराई से खंगाला जा रहा लेनदेन
एजेंसी अब पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसमें धन के स्रोत, ट्रांसफर की प्रक्रिया और अन्य जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।
नियमों के पालन पर भी सवाल
ईडी यह भी देख रही है कि क्या विदेशी संपत्ति और उससे होने वाली कमाई की जानकारी आयकर रिटर्न में दी गई थी या नहीं।
कारोबारी जगत में हलचल
इस कार्रवाई के बाद जबलपुर के व्यापारिक वर्ग में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।