जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मदन महल थाना पुलिस के काम करने के तरीके पर नाराजगी जताई है। मामला एक युवती से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने 11 जनवरी को 12:15 किलो गांजे के साथ पकड़ा हुआ बताया था।
युवती का कहना है कि वह रायपुर से ट्रेन से जबलपुर आ रही थी। रास्ते में मदन महल थाने के एक पुलिस अधिकारी ने उसके साथ गलत व्यवहार किया। जब उसने विरोध किया तो उसे जबरन थाने ले जाकर उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कर दिया गया।
मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप एन भट्ट की अदालत में हुई। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जबलपुर के आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) को साफ और निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट देने के लिए 4 हफ्ते का समय मांगा गया, लेकिन कोर्ट ने मना कर दिया। अदालत ने कहा कि उसे बहाने नहीं, सच्चाई चाहिए।
हालांकि, कोर्ट ने अभी युवती को जमानत नहीं दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी। उस दिन आईजी को अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करनी होगी।