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मां नर्मदा प्राकट्योत्सव पर विशेष: कैसे करें मां नर्मदा की सच्ची आराधना


जबलपुर -  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ सप्तमी को अचला सप्तमी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड को अपना आशीर्वाद देते हैं। वहीं, मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी हैं, जिनकी परिक्रमा की जाती है और जिनके दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश हो जाता है। जब यह दोनों पर्व एक साथ हो तो दान, स्नान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।




सूर्य पूजन विधि (Puja Rituals)
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। अगर हो पाए तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, वरना घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या नर्मदा जल और तिल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालें।
  • अपने हाथों को सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • अर्घ्य देते समय"ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप करें।
  • इसके बाद वहीं, खड़े होकर सूर्य की तीन बार परिक्रमा करें।
  • आरती से पूजा को समाप्त करें।
नर्मदा पूजन विधि (Puja Vidhi)
  • मां नर्मदा की प्रतिमा स्थापित करें या शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
  • उन्हें सिंदूर, फूल और हलवा, खीर आदि अर्पित करें।
  • नर्मदा जयंती पर दीप दान का विशेष महत्व है।
  • शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।
  • अगर आप नदी के किनारे हैं, तो आटे के 11 दीप जलाकर नदी में प्रवाहित करें।
  • पूजा के समय "त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदे" का जाप करें।
  • अंत में आरती कर पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
करें ये दान (Daan List)
इस शुभ संयोग पर की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती। सूर्य पूजन से कुंडली के दोष दूर होते हैं और आरोग्‍य व तेज की प्राप्ति होती है। वहीं, मां नर्मदा की पूजा से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन अपनी क्षमता अनुसार किसी जरूरतमंद को गेहूं, गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान जरूर करें। इससे जीवन के सभी दुख-दर्द का नाश होता है।

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