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वेटरनरी विश्वविद्यालय में 30 लाख की फर्नीचर खरीदी पर सवाल, जांच में मिलीं गंभीर अनियमितताएं

 




जबलपुर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में महू स्थित वेटरनरी कॉलेज के लिए की गई करीब 30 लाख रुपये की फर्नीचर खरीदी अब विवादों में घिर गई है। खरीदी प्रक्रिया में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों की अनदेखी के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच कराई, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए सिविल एवं सप्लाई कार्यों से जुड़े प्रोफेसर एस.एस. कारमोरे का तबादला जबलपुर से महू कर दिया गया है।

मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय विशेष समिति गठित की थी। समिति ने दस्तावेजों और खरीदी प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में फर्नीचर खरीदी से जुड़े कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। बताया गया है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और पात्रता को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई।

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिस कंपनी को फर्नीचर सप्लाई का ठेका दिया गया, उसका मुख्य कार्यक्षेत्र फर्नीचर निर्माण या बिक्री नहीं था। संबंधित फर्म मूल रूप से कंसल्टेंसी सेवाओं से जुड़ी संस्था बताई गई है। इसके बावजूद उसे लाखों रुपये की खरीदी का जिम्मा सौंप दिया गया। जांच समिति ने इस तथ्य को गंभीर अनियमितता माना है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ठेका प्राप्त करने वाली कंपनी के पास फर्नीचर निर्माण या सप्लाई का पर्याप्त अनुभव नहीं था। न तो उसके पास इस क्षेत्र में पूर्व कार्यों का रिकॉर्ड था और न ही आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता स्पष्ट थी। इसके बावजूद कंपनी को फायदा पहुंचाए जाने पर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को नजरअंदाज कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया।

फर्नीचर की गुणवत्ता को लेकर भी जांच समिति ने गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। महू कॉलेज में पहुंचाए गए फर्नीचर का निरीक्षण करने पर पाया गया कि कई सामान निर्धारित मानकों और तकनीकी गुणवत्ता पर खरे नहीं उतर रहे थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में गुणवत्ता संबंधी कमियों का उल्लेख करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश की है।

इस पूरे मामले को लेकर छात्र संगठन एबीवीपी ने भी पहले विरोध प्रदर्शन किया था और खरीदी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। शिकायतों और विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कराई, जिसके बाद अब कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संस्थान की पारदर्शिता और साख से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जांच के दायरे को और विस्तारित किया जा रहा है ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, जांच में जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

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