जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के एमसीए विभाग में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। विभाग की कंप्यूटर लैब से सीपीयू चोरी होने की घटना ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
जानकारी के अनुसार, इस चोरी में विश्वविद्यालय के ही एक कर्मचारी की संलिप्तता सामने आई है। साथ ही कुछ बाहरी लोगों के शामिल होने की भी बात कही जा रही है।
CCTV फुटेज में कैद हुई वारदात
लैब से सामान गायब होने की जानकारी मिलते ही विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद लैब और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय प्रेस में कार्यरत संतोष यादव, सफाई कर्मी प्रमोद बर्मन की मदद से लैब से सीपीयू निकालकर ले जा रहा था।
फुटेज में संतोष यादव के साथ उसका बेटा और बेटी भी दिखाई दिए। सभी लोग मिलकर सीपीयू को मोटरसाइकिल पर रखकर कैंपस से बाहर ले जाते नजर आए।
कुलसचिव की चेतावनी के बाद लौटा सामान
मामले की जानकारी मिलते ही कुलसचिव रविशंकर सोनवाल को अवगत कराया गया। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों को तलब किया और पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी।
प्रशासन के सख्त रुख के बाद आरोपी सफाई कर्मी ने अपनी गलती स्वीकार कर ली और चोरी किया गया सीपीयू वापस विभाग को सौंप दिया। हालांकि मुख्य आरोपी संतोष यादव का नाम पहले भी विवादित मामलों में सामने आ चुका है।
कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी
घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दोषियों के खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने से छात्रों और कर्मचारियों में नाराजगी है। चर्चा है कि आरोपी के संबंध कर्मचारी संघ अध्यक्ष संजय यादव से होने के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्ति चोरी जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर और गंभीर सवाल खड़े होंगे।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
विश्वविद्यालय में पहले से संसाधनों और आधुनिक उपकरणों की कमी बनी हुई है। ऐसे में कैंपस के अंदर से ही सामान चोरी होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। अब कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ाने की मांग तेज हो गई है।