जबलपुर। ग्वारीघाट क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक ‘बादशाह हलवाई मंदिर’ की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के पुजारी और स्थानीय रहवासियों ने रसूखदार बिल्डरों पर अधिकारियों से मिलीभगत कर करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन को खुर्द-बुर्द करने का आरोप लगाया है। मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।
नक्शों में हेरफेर का आरोप
मंदिर के पुजारी पंडित आनंद दुबे के अनुसार, वर्ष 2022 से 2026 के बीच जमीन के कई अलग-अलग नक्शे तैयार किए गए। हर नए नक्शे में मंदिर की जमीन कम दिखाई गई। उनका कहना है कि पहले जहां मंदिर परिसर साढ़े तीन एकड़ में फैला था, अब घटकर करीब डेढ़ एकड़ रह गया है। आरोप है कि भू-माफियाओं ने दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन की रजिस्ट्री करवा ली और अब वहां प्लॉटिंग की जा रही है।
ट्रस्ट और बिल्डरों की मिलीभगत का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के रख-रखाव के लिए बनाए गए ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने ही बिल्डरों से सांठगांठ कर जमीन का सौदा शुरू कर दिया। पहले भी तत्कालीन कलेक्टर द्वारा नपाई कराए जाने के बाद मामला शांत हुआ था, लेकिन अब फिर से निर्माण गतिविधियां तेज हो गई हैं।
पानी की लाइन पर निर्माण से बढ़ी समस्या
रहवासियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम की पानी की पाइपलाइन के ऊपर ही निर्माण कर दिया गया है, जिससे भविष्य में मरम्मत और जल आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकती हैं। लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट में मामला लंबित
प्रशासन के अनुसार, जमीन से जुड़ा मामला पहले से ही सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। अधिकारियों का कहना है कि यदि अतिक्रमण की नई शिकायत मिलती है, तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों ने इस पुरातात्विक धरोहर को बचाने के लिए शासन और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।