जबलपुर - खराब पेयजल व्यवस्था और लोगों की सेहत से खिलवाड़ के मामले पर National Green Tribunal (NGT) ने सख्त रुख अपनाया है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला? (कहां- कैसे)
याचिका में बताया गया कि शहर की करीब 80% पानी की पाइप लाइनें गंदे नालों और नालियों के बीच से गुजर रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक इन्हें सुधारने या बदलने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।
किसने दिए आदेश? (कौन- कब)
न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश दिए।
जांच समिति में कौन-कौन?
समिति में शामिल होंगे:
शासन के सचिव
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
जिला कलेक्टर
नगर निगम आयुक्त
इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
क्या करना होगा समिति को?
प्रभावित इलाकों का निरीक्षण
एक महीने में रिपोर्ट तैयार करना
समस्या के स्थायी समाधान सुझाना
47% पानी खराब होने का दावा
याचिका में बताया गया कि शहर में सप्लाई हो रहा करीब 47% पानी पीने लायक नहीं है। पाइप लाइनें 40-50 साल पुरानी हैं और कई जगह टूटी हुई हैं, जिससे गंदा पानी उसमें मिल रहा है। इसी कारण लोगों के घरों में बदबूदार और गंदा पानी पहुंच रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
क्यों है मामला गंभीर?
NGT ने साफ कहा है कि जनता की सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। माना जा रहा है कि इस कदम से शहर की पानी सप्लाई व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी।