जबलपुर। आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व अधिकारी जगदीश प्रसाद सरवटे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर दी है। आरोपी कोर्ट में पेश होकर मामले से जुड़े दस्तावेज भी ले चुका है।
यह पूरा मामला उस पैसे से जुड़ा है, जिसे नौकरी के दौरान गलत तरीके से कमाया गया और बाद में उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई।
ईओडब्ल्यू जांच में खुलासा
इस केस की शुरुआत आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच से हुई। साल 2025 में दर्ज एफआईआर के बाद जांच में पता चला कि आरोपी ने अपनी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति बना ली थी।
इसके बाद ईडी ने मामला संभाला और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की।
अवैध पैसे को ऐसे बनाया वैध
जांच में सामने आया कि आरोपी ने काली कमाई को पहले बैंक के जरिए सिस्टम में डाला और फिर उससे जमीन और प्रॉपर्टी खरीदी।
भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी जैसे जिलों में बड़ी मात्रा में संपत्ति होने के सबूत मिले हैं, जो उसकी आय से मेल नहीं खाते।
11 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त
एजेंसी के मुताबिक कुल करीब 11.81 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता चला है। इनमें से कई संपत्तियों को फरवरी 2026 में ही अस्थायी रूप से जब्त किया जा चुका है। ईडी का कहना है कि अवैध कमाई को साफ दिखाने की कोशिश कानूनन अपराध है। अब कोर्ट में मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और दोष साबित होने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।