जबलपुर। सनातन धर्म में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक युगांतकारी घटना मानी जाती है, जिसे हम मकर संक्रांति के रूप में मनाते हैं। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व विशेष शुभ संयोगों के साथ आ रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, इस बार सूर्यदेव 14 जनवरी की रात 9:29 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके कारण संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रहेगा। वराह वाहन और वृषभ उपवाहन पर सवार होकर आ रही यह संक्रांति समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर व्यापारियों और तपस्वियों के लिए अत्यंत मंगलकारी सिद्ध होने वाली है।
शुभ नक्षत्रों का संयोग और दान का महत्व
इस वर्ष मकर संक्रांति बुधवार को माघ कृष्ण एकादशी के दिन अनुराधा एवं ज्येष्ठा नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी। अनुराधा नक्षत्र में संक्रांति होने से कृषि उपज में वृद्धि होगी और मांगलिक कार्यों के द्वार खुलेंगे। शास्त्रानुसार, इस पुण्यकाल में पवित्र नदियों में स्नान के पश्चात सामर्थ्य अनुसार काले तिल, ऊनी वस्त्र, मच्छरदानी, कंबल, स्वर्ण और गौदान करने का विशेष महत्व है। विशेषकर काले तिल का दान शनि दोष से मुक्ति दिलाता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति कराता है।
वराह वाहन का प्रभाव: साहस और आर्थिक उन्नति
वर्ष 2026 में संक्रांति का वाहन 'वराह' और उपवाहन 'वृषभ' है। वराह शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, जो देश में साहस और पराक्रम की वृद्धि करेगा। वृषभ उपवाहन होने से धर्म और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा। बुधवार को संक्रांति पड़ने के कारण अनाज के उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और व्यापारिक वर्ग को विशेष लाभ मिलने के योग हैं। हालांकि, सितारों के संकेत बताते हैं कि इस दौरान राजनीतिक हलचल और शीत लहर का प्रकोप भी देखने को मिल सकता है।
राशि चक्र पर प्रभाव: किसका चमकेगा भाग्य
ग्रहों की इस विशेष स्थिति का सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। इस वर्ष वृष, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए समय बेहद सकारात्मक रहने वाला है। जहाँ तुला राशि वालों को पदोन्नति और वृश्चिक को धन लाभ होगा, वहीं कुंभ राशि के जातकों को कार्यों में सिद्धि प्राप्त होगी। इसके विपरीत मेष, मिथुन और धनु राशि के जातकों को थोड़ा सतर्क रहने और दान-पुण्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
